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ओम जय जगदीश हरे

1.

ओम जय जगदीश हरे,
स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट,
क्षण में दूर करे॥
॥ओम जय जगदीश हरे॥


2.

जो ध्यावे फल पावे,
दुख बिनसे मन का,
स्वामी दुख बिनसे मन का।
सुख सम्पति घर आवे,
कष्ट मिटे तन का॥
॥ओम जय जगदीश हरे॥


3.

मात पिता तुम मेरे,
शरण गहूं मैं किसकी,
स्वामी शरण गहूं किसकी।
तुम बिन और न दूजा,
आस करूं मैं किसकी॥
॥ओम जय जगदीश हरे॥


4.

तुम पूरण परमात्मा,
तुम अंतरयामी,
स्वामी तुम अंतरयामी।
पारब्रह्म परमेश्वर,
तुम सब के स्वामी॥
॥ओम जय जगदीश हरे॥


5.

तुम करुणा के सागर,
तुम पालनकर्ता,
स्वामी तुम पालनकर्ता,
मैं मूरख खल कामी,
कृपा करो भर्ता॥
॥ओम जय जगदीश हरे॥


6.

तुम हो एक अगोचर,
सबके प्राणपति,
स्वामी सबके प्राणपति
किस विधि मिलूं दयामय,
तुमको मैं कुमति॥
॥ओम जय जगदीश हरे॥


7.

दीनबंधु दुखहर्ता,
तुम रक्षक मेरे,
स्वामी तुम रक्षक मेरे।
अपने हाथ बढाओ,
द्वार पडा तेरे॥
॥ओम जय जगदीश हरे॥


8.

विषय विकार मिटाओ,
पाप हरो देवा,
स्वमी पाप हरो देवा।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,
संतन की सेवा॥
॥ओम जय जगदीश हरे॥


9.

तन मन धन सब कुछ है तेरा,
(तन मन धन जो कुछ है,
सब ही है तेरा।)
स्वामी सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण,
क्या लागे मेरा॥
॥ओम जय जगदीश हरे॥


10.

ओम जय जगदीश हरे,
स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट,
क्षण में दूर करे॥
॥ओम जय जगदीश हरे॥

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Chalisa

Om Jai Jagdish Hare
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जय गणेश, जय गणेश देवा – गणेश आरती

1.

जय गणेश, जय गणेश,
जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा॥


2.

एक दन्त दयावंत,
चार भुजा धारी।
माथे पर तिलक सोहे,
मुसे की सवारी॥


3.

पान चढ़े फुल चढ़े,
और चढ़े मेवा।
लडुवन का भोग लगे,
संत करे सेवा॥


1.

जय गणेश, जय गणेश,
जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा॥


4.

अंधन को आँख देत,
कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत,
निर्धन को माया॥


5.

सुर श्याम शरण आये,
सफल किजे सेवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा॥

(Or –
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो जाऊं बलिहारी॥)


1.

जय गणेश, जय गणेश,
जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा॥


श्लोक:

व्रकतुंड महाकाय,
सूर्यकोटी समप्रभाः।
निर्वघ्नं कुरु मे देव,
सर्वकार्येषु सर्वदा॥


ॐ गं गणपतये नमो नमः
श्री सिद्धिविनायक नमो नमः।
अष्टविनायक नमो नमः
गणपति बाप्पा मोरया॥

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Chalisa

Jai Ganesh Jai Ganesh Deva – Ganesh Aarti
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गणपति की सेवा मंगल मेवा – गणपति आरती

1.

गणपति की सेवा मंगल मेवा,
सेवा से सब विध्न टरें।
तीन लोक तैतिस देवता,
द्वार खड़े सब अर्ज करे॥
(Or – तीन लोक के सकल देवता,
द्वार खड़े नित अर्ज करें॥)


2.

ऋद्धि-सिद्धि दक्षिण वाम विराजे,
अरु आनन्द सों चवर करें।
धूप दीप और लिए आरती,
भक्त खड़े जयकार करें॥


3.

गुड़ के मोदक भोग लगत है,
मुषक वाहन चढ़ा करें।
सौम्यरुप सेवा गणपति की,
विध्न भागजा दूर परें॥


4.

भादों मास और शुक्ल चतुर्थी,
दिन दोपारा पूर परें ।
लियो जन्म गणपति प्रभुजी ने,
दुर्गा मन आनन्द भरें॥


5.

अद्भुत बाजा बजा इन्द्र का,
देव वधू जहँ गान करें।
श्री शंकर के आनन्द उपज्यो,
नाम सुन्या सब विघ्न टरें॥


6.

आन विधाता बैठे आसन,
इन्द्र अप्सरा नृत्य करें।
देख वेद ब्रह्माजी जाको,
विघ्न विनाशक नाम धरें॥


7.

एकदन्त गजवदन विनायक,
त्रिनयन रूप अनूप धरें।
पगथंभा सा उदर पुष्ट है,
देख चन्द्रमा हास्य करें॥


8.

दे श्राप श्री चंद्रदेव को,
कलाहीन तत्काल करें।
चौदह लोक मे फिरे गणपति,
तीन भुवन में राज्य करें॥


9.

गणपति की पूजा पहले करनी,
काम सभी निर्विघ्न सरें।
श्री प्रताप गणपतीजी को,
हाथ जोड स्तुति करें॥


1.

गणपति की सेवा मंगल मेवा,
सेवा से सब विध्न टरें।
तीन लोक तैतिस देवता,
द्वार खड़े सब अर्ज करे॥
(तीन लोक के सकल देवता,
द्वार खड़े नित अर्ज करें॥)


श्लोक –

व्रकतुंड महाकाय, सूर्यकोटी समप्रभः।
निर्वघ्नं कुरु मे देव, सर्वकार्येषु सर्वदा॥


ॐ गं गणपतये नमो नमः
श्री सिद्धिविनायक नमो नमः।
अष्टविनायक नमो नमः
गणपति बाप्पा मोरया॥

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Ganpati Ki Seva, Mangal Meva – Shri Ganesh Aarti
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सुखकर्ता दुखहर्ता – जय देव, जय मंगलमूर्ती

1.

सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची।
नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची॥

सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची।
कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची॥
जय देव, जय देव


जय देव, जय देव,
जय मंगलमूर्ती, हो श्री मंगलमूर्ती
दर्शनमात्रे मन कामनापु्र्ती
जय देव, जय देव


2.

रत्नखचित फरा तूज गौरीकुमरा।
चंदनाची उटी कुंकुम केशरा॥

हिरेजड़ित मुकुट शोभतो बरा।
रुणझुणती नूपुरे चरणी घागरीया॥
जय देव, जय देव


जय देव, जय देव,
जय मंगलमूर्ती, हो श्री मंगलमूर्ती
दर्शनमात्रे मन कामनापु्र्ती
जय देव, जय देव


3.

लंबोदर पीतांबर फणीवर बंधना।
सरळ सोंड वक्रतुण्ड त्रिनयना॥

दास रामाचा वाट पाहे सदना।
संकटी पावावें, निर्वाणी रक्षावे, सुरवरवंदना॥
जय देव, जय देव


जय देव, जय देव,
जय मंगलमूर्ती, हो श्री मंगलमूर्ती
दर्शनमात्रे मन कामनापु्र्ती
जय देव, जय देव


4.

घालीन लोटांगण, वंदिन चरण।
डोळ्यांनी पाहिन रूप तुझे।
प्रेमे आलिंगीन आनंदे पुजिन।
भावें ओवाळिन म्हणे नामा॥


5.

त्वमेव माता च पिता त्वमेव,
त्वमेव बंधुश्च सखा त्वमेव॥
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव,
त्वमेव सर्व मम देवदेव॥


6.

कायेन वाचा मनसेंद्रियैर्वा,
बुध्दात्मना वा प्रकृतिस्वभावात्।
करोमि यद्यत् सकलं परस्मै
नारायणायेति समर्पयामि॥


7.

अच्युतं केशवं रामनारायणं,
कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरि।
श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं,
जानकीनायकं रामचंद्रं भजे॥


8.

हरे राम हरे राम,
राम राम हरे हरे।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण,
कृष्ण कृष्ण हरे हरे॥

हरे राम हरे राम,
राम राम हरे हरे।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण,
कृष्ण कृष्ण हरे हरे॥

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Chalisa

सुखकर्ता दुखहर्ता – जय देव, जय मंगलमूर्ती
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ओम जय शिव ओंकारा – शिव आरती

1.

ओम जय शिव ओंकारा।
प्रभु हर शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
॥ओम जय शिव ओंकारा॥


2.

एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
स्वामी (शिव) पंचानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन, वृषवाहन साजे॥
॥ओम जय शिव ओंकारा॥


3.

दोभुज चार चतुर्भुज, दशभुज अति सोहे।
स्वामी दशभुज अति सोहे।
तीनो रूप निरखते, त्रिभुवन जन मोहे॥
॥ओम जय शिव ओंकारा॥


4.

अक्षमाला वनमाला, मुण्डमाला धारी।
स्वामी मुण्डमाला धारी।

त्रिपुरारी कंसारी, कर माला धारी॥
Or
(चन्दन मृगमद सोहे, भाले शशि धारी॥)
॥ओम जय शिव ओंकारा॥


5.

श्वेतांबर पीतांबर, बाघंबर अंगे।
स्वामी बाघंबर अंगे।
सनकादिक गरुडादिक, भूतादिक संगे॥
॥ओम जय शिव ओंकारा॥


6.

करमध्येन कमंडलु, चक्र त्रिशूलधारी।
स्वामी चक्र त्रिशूलधारी।
सुखकर्ता दुखहर्ता, जग-पालन करता॥
॥ओम जय शिव ओंकारा॥


7.

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, जानत अविवेका।
स्वामी जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर ओम मध्ये, ये तीनों एका॥
॥ओम जय शिव ओंकारा॥


8.

काशी में विश्वनाथ विराजत, नन्दो ब्रह्मचारी।
स्वामी नन्दो ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥
॥ओम जय शिव ओंकारा॥


9.

त्रिगुण स्वामीजी की आरती, जो कोइ नर गावे।
स्वामी जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी , मन वांछित फल पावे॥
॥ओम जय शिव ओंकारा॥


1.

ओम जय शिव ओंकारा।
प्रभु हर शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
॥ओम जय शिव ओंकारा॥

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Om Jai Shiv Omkara – Shiv Aarti
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अम्बे तू है जगदम्बे काली

1.

अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली।
तेरे ही गुण गायें भारती,
ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती॥


2.

तेरे भक्त जनों पे माता,
भीर पड़ी है भारी।
दानव दल पर टूट पडो माँ,
करके सिंह सवारी॥

सौ सौ सिंहों से तु बलशाली,
अष्ट भुजाओं वाली।
दुष्टों को पल में संहारती,
ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती॥


3.

माँ बेटे का है इस जग में,
बड़ा ही निर्मल नाता।
पूत कपूत सूने हैं पर,
ना माता सुनी कुमाता॥

सब पे करुणा बरसाने वाली,
अमृत बरसाने वाली।
दुखियों के दुखडे निवारती,
ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती॥


4.

नहीं मांगते धन और दौलत,
ना चाँदी, ना सोना।
हम तो मांगे माँ तेरे मन में,
इक छोटा सा कोना॥

सबकी बिगडी बनाने वाली,
लाज बचाने वाली।
सतियों के सत को संवारती,
ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती॥


1.

अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली।
तेरे ही गुण गायें भारती,
ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती॥

ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती॥
ओ मैया, हम सब उतारें तेरी आरती॥

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Chalisa

Ambe Tu Hai Jagdambe Kali
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जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी

1.

जय अम्बे गौरी,
मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत,
हरि ब्रह्मा शिव री॥
॥मैया जय अम्बे गौरी॥


2.

मांग सिंदूर बिराजत,
टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना,
चंद्रवदन नीको॥
॥मैया जय अम्बे गौरी॥


3.

कनक समान कलेवर,
रक्ताम्बर राजै।
रक्त-पुष्प गल माला,
कंठन पर साजै॥
॥मैया जय अम्बे गौरी॥


4.

केहरि वाहन राजत,
खड्ग खप्पर धारी।
सुर-नर मुनि-जन सेवत,
तिनके दुःखहारी॥
॥मैया जय अम्बे गौरी॥


5.

कानन कुण्डल शोभित,
नासाग्रे मोती।
कोटिक चंद्र दिवाकर,
राजत सम ज्योति॥
॥मैया जय अम्बे गौरी॥


6.

शुम्भ निशुम्भ बिदारे,
महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना,
निशिदिन मदमाती॥
॥मैया जय अम्बे गौरी॥


7.

चण्ड मुण्ड संहारे,
शोणितबीज हरे।
मधु कैटभ दोउ मारे,
सुर भयहीन करे॥
॥मैया जय अम्बे गौरी॥


8.

ब्रम्हाणी रुद्राणी,
तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी,
तुम शिव पटरानी॥
॥मैया जय अम्बे गौरी॥


9.

चौंसठ योगिनि गावत,
नृत्य करत भैरूं।
बाजत ताल मृदंगा,
औ बाजत डमरू॥
॥मैया जय अम्बे गौरी॥


10.

तुम ही जगकी माता,
तुम ही हो भरता।
भक्तनकी दुःख हरता,
सुख सम्पति करता॥
॥मैया जय अम्बे गौरी॥


11.

भुजा चार अति शोभित,
खड्ग खप्पर धारी।
मनवांछित फल पावत,
सेवत नर नारी॥
॥मैया जय अम्बे गौरी॥


12.

कंचन थाल विराजत,
अगर कपूर बाती।
(श्री) मालकेतुमें राजत,
कोटिरतन ज्योति॥
॥मैया जय अम्बे गौरी॥


13.

(श्री) अम्बेजी की आरती,
जो कोई नर गावै।
कहत शिवानंद स्वामी,
सुख सम्पत्ति पावै॥
॥मैया जय अम्बे गौरी॥


1.

जय अम्बे गौरी,
मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत,
हरि ब्रह्मा शिव री॥
॥मैया जय अम्बे गौरी॥

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Jai Ambe Gauri – Ambe Maa Ki Aarti
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ॐ जय लक्ष्मी माता – लक्ष्मी जी की आरती

1.

ॐ जय लक्ष्मी माता,
मैया जय लक्ष्मी माता।
तुम को निश दिन सेवत,
मैय्याजी को निस दिन सेवत,
हर-विष्णु-धाता॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता॥


2.

उमा, रमा, ब्रह्माणी,
तुम ही जग-माता,
मैया, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत,
नारद ऋषि गाता॥
॥ओम जय लक्ष्मी माता॥


3.

दुर्गा रूप निरंजनि,
सुख-सम्पति दाता,
मैया, सुख-सम्पति दाता।
जो कोई तुमको ध्याता,
ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
॥ओम जय लक्ष्मी माता॥


4.

तुम पाताल निवासिनी,
तुम ही शुभ दाता,
मैया, तुम ही शुभ दाता।
कर्म प्रभाव प्रकाशिनी,
भव निधि की त्राता॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता॥


5.

जिस घर तुम रहती,
सब सद्‍गुण आता,
मैया, सब सद्‍गुण आता।
सब संभव हो जाता,
मन नहीं घबराता॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता॥


6.

तुम बिन यज्ञ न होवे (होते) ,
वस्त्र न कोई पाता,
मैया, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव,
सब तुमसे आता॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता॥


7.

शुभ गुण मंदिर सुंदर,
क्षीरोदधि जाता,
मैया, क्षीरोदधि जाता।
रत्न-चतुर्दश तुम बिन,
कोई नहीं पाता॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता॥


8.

महालक्ष्मी(जी) की आरती,
जो कोई नर गाता,
मैया, जो कोई नर गाता।
उर आनंद समाता,
पाप उतर जाता॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता॥


1.

ॐ जय लक्ष्मी माता,
मैया जय लक्ष्मी माता।
तुम को निश दिन सेवत,
हर-विष्णु-धाता॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता॥

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Om Jai Laxmi Mata – Laxmi Aarti
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आरती कीजै हनुमान लला की – हनुमान आरती

1.

आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्टदलन रघुनाथ कला की॥


2.

जाके बल से गिरिवर काँपै।
रोग-दोष निकट न झाँपै॥


3.

अंजनि पुत्र महा बलदाई।
संतन के प्रभु सदा सहाई॥


4.

दे बीरा रघुनाथ पठाये।
लंका जारि सीय सुधि लाये॥


5.

लंका सो कोट समुद्र सी खाई।
जात पवनसुत बार न लाई॥


6.

लंका जारि असुर सँहारे।
सियारामजी के काज सँवारे॥


7.

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।
आनि सजीवन प्रान उबारे॥


8.

पैठि पताल तोरि जम-कारे।
अहिरावन की भुजा उखारे॥


9.

बायें भुजा असुर दल मारे।
दहिने भुजा संतन जन तारे॥


10.

सुर नर मुनि आरती उतारे।
जै जै जै हनुमान उचारे॥


11.

कंचन थार कपूर लौ छाई।
आरति करत अंजना माई॥


12.

जो हनुमान जी की आरती गावै।
बसि बैकुण्ठ परमपद पावै॥

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Aarti Kije Hanuman Lala Ki - Hanuman ji ki Aarti
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जगजननी जय जय माँ, जगजननी जय जय

1.

जगजननी जय जय माँ, जगजननी जय जय।
भयहारिणी, भवतारिणी, भवभामिनि जय जय॥


2.

तू ही सत्-चित्-सुखमय, शुद्ध ब्रह्मरूपा।
सत्य सनातन, सुन्दर, पर-शिव सुर-भूपा॥

जगजननी जय जय माँ, जगजननी जय जय।
भयहारिणी, भवतारिणी, भवभामिनि जय जय॥


3.

आदि अनादि, अनामय, अविचल, अविनाशी।
अमल, अनन्त, अगोचर, अज आनन्दराशी॥

जगजननी जय जय माँ, जगजननी जय जय।
भयहारिणी, भवतारिणी, भवभामिनि जय जय॥


4.

अविकारी, अघहारी, सकल कलाधारी।
कर्ता विधि भर्ता हरि हर संहारकारी॥

जगजननी जय जय माँ, जगजननी जय जय।
भयहारिणी, भवतारिणी, भवभामिनि जय जय॥


5.

तू विधिवधू, रमा, तू उमा महामाया।
मूल प्रकृति, विद्या तू, तू जननी जाया॥

जगजननी जय जय माँ, जगजननी जय जय।
भयहारिणी, भवतारिणी, भवभामिनि जय जय॥


6.

राम, कृष्ण, तू सीता, ब्रजरानी राधा।
तू वाँछा कल्पद्रुम, हारिणि सब बाधा॥

जगजननी जय जय माँ, जगजननी जय जय।
भयहारिणी, भवतारिणी, भवभामिनि जय जय॥


7.

दश विद्या, नव दुर्गा, नाना शस्त्रकरा।
अष्टमातृका, योगिनि, नव-नव रूप धरा॥

जगजननी जय जय माँ, जगजननी जय जय।
भयहारिणी, भवतारिणी, भवभामिनि जय जय॥


8.

तू परधाम निवासिनि, महा-विलासिनि तू।
तू ही शमशान विहारिणि, ताण्डव लासिनि तू॥

जगजननी जय जय माँ, जगजननी जय जय।
भयहारिणी, भवतारिणी, भवभामिनि जय जय॥


9.

सुर-मुनि मोहिनि सौम्या, तू शोभाधारा।
विवसन विकट सरुपा, प्रलयमयी धारा॥

जगजननी जय जय माँ, जगजननी जय जय।
भयहारिणी, भवतारिणी, भवभामिनि जय जय॥


10.

तू ही स्नेहसुधामयी, तू अति गरलमना।
रत्नविभूषित तू ही, तू ही अस्थि तना॥

जगजननी जय जय माँ, जगजननी जय जय।
भयहारिणी, भवतारिणी, भवभामिनि जय जय॥


11.

मूलाधार निवासिनि, इहपर सिद्धिप्रदे।
कालातीता काली, कमला तू वर दे॥

जगजननी जय जय माँ, जगजननी जय जय।
भयहारिणी, भवतारिणी, भवभामिनि जय जय॥


12.

शक्ति शक्तिधर तू ही, नित्य अभेदमयी।
भेद प्रदर्शिनि वाणी विमले वेदत्रयी॥

जगजननी जय जय माँ, जगजननी जय जय।
भयहारिणी, भवतारिणी, भवभामिनि जय जय॥


13.

हम अति दीन दुखी माँ, विपट जाल घेरे।
हैं कपूत अति कपटी, पर बालक तेरे॥

जगजननी जय जय माँ, जगजननी जय जय।
भयहारिणी, भवतारिणी, भवभामिनि जय जय॥


14.

निज स्वभाववश जननी, दयादृष्टि कीजै।
करुणा कर करुणामयी, चरण शरण दीजै॥

जगजननी जय जय माँ, जगजननी जय जय।
भयहारिणी, भवतारिणी, भवभामिनि जय जय॥


15.

जगजननी जय जय माँ, जगजननी जय जय।
भयहारिणी, भवतारिणी, भवभामिनि जय जय॥

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Jag Janani Jai Jai Maa - Maa Durga Aarti
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आरती कुंज बिहारी की – श्री कृष्ण आरती

1.

आरती कुंज बिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।


2.

गले में बैजंती माला,
बजावे मुरली मधुर बाला,
श्रवण में कुंडल झलकाला।

नन्द के नन्द, श्री आनंद कंद,
मोहन बृज चंद,
राधिका रमण बिहारी की,
श्री गिरीधर कृष्ण मुरारी की॥


आरती कुंज बिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की


3.

गगन सम अंग कांति काली
राधिका चमक रही आली,
लतन में ठाढ़े बनमाली।

भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक,
चंद्र सी झलक,
ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥


आरती कुंज बिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की


4.

कनकमय मोर मुकुट बिलसे,
देवता दर्शन को तरसे,
गगन सों सुमन रसी बरसे।

बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग,
ग्वालिन संग,
अतुल रति गोप कुमारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥


आरती कुंज बिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की


5.


जहां ते प्रकट भई गंगा
कलुष कलि हारिणि श्री गंगा
(Or – सकल मल हारिणि श्री गंगा)
स्मरन ते होत मोह भंगा।

बसी शिव शीष, जटा के बीच,
हरै अघ कीच,
चरन छवि श्री बनवारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥


आरती कुंज बिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की


6.


चमकती उज्ज्वल तट रेनू,
बज रही वृंदावन बेनू,
चहुं दिशी गोपि ग्वाल धेनू।

हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद,
कटत भव फंद,
टेर सुन दीन भिखारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥


आरती कुंज बिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की


7.

आरती कुंज बिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की

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Aarti Kunj Bihari Ki - Krishna Aarti
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मैं आरती तेरी गाउँ, ओ केशव कुञ्ज बिहारी

1.

मैं आरती तेरी गाउँ,
ओ केशव कुञ्ज बिहारी।
मैं नित नित शीश नवाऊँ,
ओ मोहन कृष्ण मुरारी॥


2.

है तेरी छबि अनोखी,
ऐसी ना दूजी देखी।
तुझ सा ना सुन्दर कोई,
ओ मोर मुकुटधारी॥


3.

मैं आरती तेरी गाउँ,
ओ केशव कुञ्ज बिहारी।
मैं नित नित शीश नवाऊँ,
ओ मोहन कृष्ण मुरारी॥


4.

जो आए शरण तिहारी,
विपदा मिट जाए सारी।
हम सब पर कृपा रखना,
ओ जगत के पालनहारी॥


5.

मैं आरती तेरी गाउँ,
ओ केशव कुञ्ज बिहारी।
मैं नित नित शीश नवाऊँ,
ओ मोहन कृष्ण मुरारी॥

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मैं आरती तेरी गाउँ, ओ केशव कुञ्ज बिहारी
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श्री बद्रीनाथजी की आरती – बद्रीनाथ स्तुति

1.

पवन मंद सुगंध शीतल,
हेम मन्दिर शोभितम्।
निकट गंगा बहत निर्मल,
श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्॥


2.

शेष सुमिरन, करत निशदिन,
धरत ध्यान महेश्वरम्।
वेद ब्रह्मा करत स्तुति
श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्॥


3.

इन्द्र चन्द्र कुबेर दिनकर,
धूप दीप निवेदितम्।
सिद्ध मुनिजन करत जय जय
श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्॥


4.

शक्ति गौरी गणेश शारद,
नारद मुनि उच्चारणम्।
योग ध्यान अपार लीला
श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्॥


5.

यक्ष किन्नर करत कौतुक,
गान गंधर्व प्रकाशितम्।
लक्ष्मी देवी चंवर डोले
(श्री भूमि लक्ष्मी चँवर डोले)
श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्॥


6.

कैलाशमे एक देव निरंजन,
शैल शिखर महेश्वरम।
राजा युधिष्टिर करत स्तुती,
श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम्॥


7.

यह बद्रीनाथ पंच रत्न,
पठन पाप विनाशनम्।
नरनारायण तप निरत
श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्॥
Or
(श्री बद्रीनाथ (जी) की परम स्तुति,
यह पढत पाप विनाशनम्।
कोटि-तीर्थ सुपुण्य सुन्दर,
सहज अति फलदायकम्॥)


1.

पवन मंद सुगंध शीतल,
हेम मन्दिर शोभितम्।
निकट गंगा बहत निर्मल,
श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्॥

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श्री बद्रीनाथजी की आरती – बद्रीनाथ स्तुति
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जय लक्ष्मीरमणा – सत्यनारायण आरती

1.

जय लक्ष्मीरमणा,
श्री जय लक्ष्मीरमणा।
सत्यनारायण स्वामी,
सत्यनारायण स्वामी,
जन पातक हरणा॥

॥ओम जय लक्ष्मी रमणा॥


2.

रत्न जड़ित सिंहासन,
अद्भुत छवि राजे,
स्वामी अद्भुत छवि राजे।

नारद करत निरंजन,
नारद करत निरंजन,
घंटा ध्वनि बजे॥

॥ओम जय लक्ष्मी रमणा॥


3.

प्रगट भये कलि कारन,
द्विज को दरस दियो,
स्वामी द्विज को दरश दियो।

बुढा ब्राह्मण बनकर,
बुढा ब्राह्मण बनकर,
कंचन महल कियो॥

॥ओम जय लक्ष्मी रमणा॥


4.

दुर्बल भील कठारो,
जिनपर कृपा करी,
स्वामी जिनपर कृपा करी।

चन्द्रचूड एक राजा,
चन्द्रचूड एक राजा,
जिनकी विपति हरी॥

॥ओम जय लक्ष्मी रमणा॥


5.

वैश्य मनोरथ पायो,
श्रद्धा तज दीन्ही,
स्वामी श्रद्धा तज दीनी।

सो फल भोग्यो प्रभुजी,
सो फल भोग्यो प्रभुजी,
फिर स्तुति किन्ही॥

॥ओम जय लक्ष्मी रमणा॥


6.

भाव भक्ति के कारण,
छीन छीन रूप धरयो,
स्वामी छीन छीन रूप धरयो।

श्रद्धा धारण किनी,
श्रद्धा धारण किनी,
तिनके काज सरयो॥

॥ओम जय लक्ष्मी रमणा॥


7.

ग्वाल बाल संग राजा,
वन में भक्ति करी,
स्वामी वन में भक्ति करी।

मनवांछित फल दीन्हो,
मनवांछित फल दीन्हो,
दीनदयालु हरी॥

॥ओम जय लक्ष्मी रमणा॥


8.

चढात प्रसाद सवाया,
कदली फल मेवा,
स्वामी कदली फल मेवा।

धुप दीप तुलसी से,
धुप दीप तुलसी से,
राजी सत्यदेवा॥

॥ओम जय लक्ष्मी रमणा॥


9.

श्री सत्यनारायण जी की आरती,
जो कोई नर गावे,
स्वामी जो कोई नर गावे।

तन मन सुख सम्पति,
तन मन सुख सम्पति,
(Or – कहत शिवानंद स्वामी)
मनवांछित फल पावे॥

॥ओम जय लक्ष्मी रमणा॥


10.

जय लक्ष्मीरमणा,
श्री लक्ष्मी रमणा।
सत्य नारायण स्वामी,
सत्य नारायण स्वामी,
जन पातक हरणा॥

॥ओम जय लक्ष्मी रमणा॥

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Jai Laxmi Ramana - Satyanarayan Aarti
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श्रीरामचन्द्र कृपालु भज मन

1.

श्रीरामचन्द्र कृपालु भज मन
हरण भवभय दारुणम्।
नवकंज-लोचन कंज-मुख
कर-कंज पद-कंजारुणम्॥


2.

कंदर्प अगणित अमित छबि,
नव नील नीरज सुन्दरम्।
पटपीत मानहुं तड़ित रूचि-शुची,
नौमि जनक सुतावरम्॥

श्रीरामचन्द्र कृपालु भज मन
हरण भवभय दारुणम्।


3.

भजु दीन बन्धु दिनेश
दानव दैत्यवंश निकन्दनम्।
रघुनन्द आनंदकंद कोशल चन्द
दशरथ नन्दनम्॥

श्रीरामचन्द्र कृपालु भज मन
हरण भवभय दारुणम्।


4.

सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु,
उदारु अङ्ग विभूषणम्।
आजानुभुज शर चापधर
सङ्ग्राम-जित-खर दूषणम्॥

श्रीरामचन्द्र कृपालु भज मन
हरण भवभय दारुणम्।


5.

इति वदति तुलसीदास,
शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
मम हृदयकंज निवास कुरु,
कामादि खलदल गंजनम्॥

श्रीरामचन्द्र कृपालु भज मन
हरण भवभय दारुणम्।


6.

मनु जाहीं राचेउ मिलिहि सो बरु
सहज सुन्दर साँवरो।
करुना निधान सुजान सीलु
सनेहु जानत रावरो॥

श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन
हरण भवभय दारुणम्।


7.

एही भांति गोरी असीस सुनी
सिय सहित हिय हरषीं अली।
तुलसी भावानिह पूजी पुनि-पुनि
मुदित मन मंदिर चली॥

श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन
हरण भवभय दारुणम्।


8.

जानी गौरी अनुकूल सिय
हिय हरषु न जाइ कहि।
मंजुल मंगल मूल बाम
अंग फरकन लगे॥


1.

श्रीरामचन्द्र कृपालु भज मन
हरण भवभय दारुणम्।
नवकंज-लोचन कंज-मुख
कर-कंज पद-कंजारुणम्॥

॥सियावर रामचंद्र की जय॥

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श्रीरामचन्द्र कृपालु भज मन
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श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊँ

1.

श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊँ,
कुंज बिहारी तेरी आरती गाऊँ।
(हे गिरिधर तेरी आरती गाऊँ)
आरती गाऊँ प्यारे तुमको रिझाऊँ,
श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊँ॥


2.

मोर मुकुट प्रभु शीश पे सोहे,
प्यारी बंसी मेरो मन मोहे।
देख छवि बलिहारी मैं जाऊँ,
श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊँ॥


3.

चरणों से निकली गंगा प्यारी,
जिसने सारी दुनिया तारी।
मैं उन चरणों के दर्शन पाऊँ,
श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊँ॥


4.

दास अनाथ के नाथ आप हो,
दुःख सुख जीवन प्यारे साथ आप हो।
हरी चरणों में शीश झुकाऊँ,
श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊँ॥


5.

श्री हरीदास के प्यारे तुम हो,
मेरे मोहन जीवन धन हो।
देख युगल छवि बलि बलि जाऊँ,
श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊँ॥


6.

आरती गाऊँ प्यारे तुमको रिझाऊँ,
हे गिरिधर तेरी आरती गाऊँ,
आरती गाऊं प्यारे तुमको रिझाऊं।
कुंज बिहारी तेरी आरती गाऊँ,
श्याम सुन्दर तेरी आरती गाऊँ,
श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊँ॥

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श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊँ
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भोर भई दिन चढ़ गया – माँ वैष्णो देवी आरती

1.

भोर भई दिन चढ़ गया, मेरी अम्बे
हो रही जय जय कार मंदिर विच
आरती जय माँ
हे दरबारा वाली, आरती जय माँ
हे पहाड़ा वाली आरती जय माँ


2.

काहे दी मैया तेरी, आरती बनावा
काहे दी मैया तेरी, आरती बनावा
काहे दी पावां विच, बाती मंदिर विच
आरती जय माँ

सुहे चोलेयाँवाली आरती जय माँ
हे पहाड़ा वाली आरती जय माँ


3.

सर्व सोने दी तेरी, आरती बनावा
सर्व सोने दी तेरी, आरती बनावा
अगर कपूर पावां, बाती मंदिर विच
आरती जय माँ

हे माँ पिंडी रानी, आरती जय माँ
हे पहाड़ा वाली, आरती जय माँ


4.

कौन सुहागन दिवा, बालेया मेरी मैया
कौन सुहागन दिवा, बालेया मेरी मैया
कौन जागेगा सारी, रात मंदिर विच
आरती जय माँ

सच्चियाँ ज्योतां वाली, आरती जय माँ
हे पहाड़ा वाली, आरती जय माँ


5.

सर्व सुहागिन दिवा, बालेया मेरी मैया
सर्व सुहागिन दिवा, बालेया मेरी मैया
ज्योत जागेगी सारी रात मंदिर विच
आरती जय माँ

हे माँ त्रिकुटा रानी, आरती जय माँ
हे पहाड़ा वाली, आरती जय माँ


6.

जुग जुग जीवे तेरा, जम्मुए दा राजा
जुग जुग जीवे तेरा, जम्मुए दा राजा
जिस तेरा भवन बनाया मंदिर विच
आरती जय माँ

हे मेरी अम्बे रानी, आरती जय माँ
हे पहाड़ा वाली, आरती जय माँ


7.

सिमर चरण तेरा, ध्यानु यश गावें
जो ध्यावे सो, यो फल पावे
रख बाणे वाली, लाज मंदिर विच
आरती जय माँ

सोहनेया मंदिरां वाली आरती जय माँ
हे पहाड़ा वाली आरती जय माँ


1.

भोर भई दिन चढ़ गया, मेरी अम्बे
भोर भई दिन चढ़ गया, मेरी अम्बे
हो रही जय जयकार मंदिर विच
आरती जय माँ

हे दरबारा वाली, आरती जय माँ
हे पहाड़ा वाली आरती जय माँ

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भोर भई दिन चढ़ गया – माँ वैष्णो देवी आरती
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जय सन्तोषी माता – सन्तोषी माता आरती

1.

जय सन्तोषी माता,
मैया सन्तोषी माता।
अपने सेवक जन की,
सुख सम्पत्ति दाता॥
॥जय सन्तोषी माता॥


2.

सुन्दर चीर सुनहरी,
माँ धारण कीन्हों।
हीरा पन्ना दमके,
तन श्रृंगार कीन्हों॥
॥जय सन्तोषी माता॥


3.

गेरू लाल छटा छवि,
बदन कमल सोहे।
मन्द हंसत करुणामयी,
त्रिभुवन मन मोहे॥
॥जय सन्तोषी माता॥


4.

स्वर्ण सिंहासन बैठी,
चंवर ढुरें प्यारे।
धूप दीप मधुमेवा,
भोग धरें न्यारे॥
॥जय सन्तोषी माता॥


5.

गुड़ अरु चना परमप्रिय,
ता मे संतोष कियो।
सन्तोषी कहलाई,
भक्तन वैभव दियो॥
॥जय सन्तोषी माता॥


6.

शुक्रवार प्रिय मानत,
आज दिवस सोही।
भक्त मण्डली छाई,
कथा सुनत मोही॥
॥जय सन्तोषी माता॥


7.

मंदिर जगमग ज्योति,
मंगल ध्वनि छाई।
विनय करें हम सेवक,
चरनन सिर नाई॥
॥जय सन्तोषी माता॥


8.

भक्ति भावमय पूजा,
अंगीकृत कीजै।
जो मन बसै हमारे,
इच्छा फल दीजै॥
॥जय सन्तोषी माता॥


9.

दुखी, दरिद्री, रोगी,
संकट मुक्त किये।
बहु धन-धान्य भरे घर,
सुख सौभाग्य दिये॥
॥जय सन्तोषी माता॥


10.

ध्यान धर्यो जिस जन ने,
मनवांछित फल पायो।
पूजा कथा श्रवण कर,
घर आनन्द आयो॥
॥जय सन्तोषी माता॥


11.

शरण गहे की लज्जा,
रखियो जगदम्बे।
संकट तू ही निवारे,
दयामयी अम्बे॥
॥जय सन्तोषी माता॥


12.

सन्तोषी माता की आरती,
जो कोई जन गावे।
ऋद्धि-सिद्धि, सुख-सम्पत्ति,
जी भरकर पावे॥
॥जय सन्तोषी माता॥


1.

जय सन्तोषी माता,
मैया सन्तोषी माता।
अपने सेवक जन की,
सुख सम्पत्ति दाता॥
॥जय सन्तोषी माता॥

Aarti

Chalisa

Jai Santoshi Mata - Santoshi Mata ki Aarti
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दुर्गे दुर्घट भारी तुजविण संसारी

1.

दुर्गे दुर्घट भारी तुजविण संसारी।
अनाथ नाथे अम्बे करुणा विस्तारी।
वारी वारी जन्म मरणांते वारी।
हारी पडलो आता संकट निवारी॥
॥जय देवी जय देवी॥


2.

जय देवी, जय देवी, महिषासुरमथिनी।
सुरवर ईश्वर वरदे तारक संजीवनी॥
॥जय देवी, जय देवी॥


3.

त्रिभुवन-भुवनी पाहता तुज ऐसी नाही।
चारी श्रमले परन्तु न बोलवे काही।
साही विवाद करिता पडले प्रवाही।
ते तू भक्तालागी पावसि लवलाही॥
॥जय देवी, जय देवी॥


4.

जय देवी, जय देवी, महिषासुर-मथिनी।
सुरवर ईश्वर वरदे तारक संजीवनी॥
॥जय देवी, जय देवी॥


5.


प्रसन्न वदने प्रसन्न होसी निजदासा।
क्लेशांपासुनि सोडवि तोडी भवपाशा।
अम्बे तुजवाचून कोण पुरविल आशा।
नरहरी तल्लिन झाला पदपंकजलेशा॥
॥जय देवी जय देवी॥


6.

जय देवी, जय देवी, महिषासुरमथिनी।
सुरवर ईश्वर वरदे तारक संजीवनी॥
॥जय देवी, जय देवी॥


7.

दुर्गे दुर्घट भारी तुजविण संसारी।
अनाथ नाथे अम्बे करुणा विस्तारी।
॥जय देवी जय देवी॥

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दुर्गे दुर्घट भारी तुजविण संसारी
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मंगल की सेवा सुन मेरी देवा – कालीमाता की आरती

1.

मंगल की सेवा सुन मेरी देवा,
हाथ जोड तेरे द्वार खडे।
पान सुपारी ध्वजा नारियल
ले ज्वाला तेरी भेट धरे॥


2.

सुन जगदम्बे न कर विलम्बे,
संतन के भडांर भरे।
संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली,
जय काली कल्याण करे॥


3.

बुद्धि विधाता तू जग माता,
मेरा कारज सिद्व करे।
चरण कमल का लिया आसरा,
शरण तुम्हारी आन पडे॥


4.

जब जब भीड पडी भक्तन पर,
तब तब आप सहाय करे।
संतन प्रतिपाली सदा खुशाली,
जय काली कल्याण करे॥


5.

गुरु के वार सकल जग मोहयो,
तरुणी रूप अनूप धरे।
माता होकर पुत्र खिलावे,
कही भार्या भोग करे॥


6.

शुक्र सुखदाई सदा सहाई,
संत खडे जयकार करे।
सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली,
जय काली कल्याण करे॥


7.

ब्रह्मा विष्णु महेश फल लिये,
भेट देन तेरे द्वार खडे।
अटल सिहांसन बैठी मेरी माता,
सिर सोने का छत्र फिरे॥


8.

वार शनिचर कुकम बरणो,
जब लुंकड़ पर हुकुम करे।
सन्तन प्रतिपाली सदा खुशाली,
जै काली कल्याण करे॥


9.

खड्ग खप्पर त्रिशुल हाथ लिये,
रक्त बीज को भस्म करे।
शुम्भ निशुम्भ को क्षण में मारे,
महिषासुर को पकड दले॥
(रक्त बीज, शुम्भ निशुम्भ और महिषासुर वध के बारे में विस्तार से जानने के लिए – दुर्गा सप्तशती अर्थसहित पढ़े – दुर्गा सप्तशती)


10.

आदित वारी आदि भवानी,
जन अपने को कष्ट हरे।
संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली,
जय काली कल्याण करे॥


11.

कुपित होकर दानव मारे,
चण्डमुण्ड सब चूर करे।
जब तुम देखी दया रूप हो,
पल में सकंट दूर करे॥


12.

सौम्य स्वभाव धरयो मेरी माता,
जन की अर्ज कबूल करे।
सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली,
जय काली कल्याण करे॥


13.

सात बार की महिमा बरनी,
सब गुण कौन बखान करे।
सिंह पीठ पर चढी भवानी,
अटल भवन में राज्य करे॥


14.

दर्शन पावे मंगल गावे,
सिद्ध साधक तेरी भेट धरे।
संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली,
जय काली कल्याण करे॥


15.

ब्रह्मा वेद पढे तेरे द्वारे,
शिव शंकर हरी ध्यान धरे।
इन्द्र कृष्ण तेरी करे आरती,
चंवर कुबेर डुलाय रहे॥


16.

जय जननी जय मातु भवानी,
अटल भवन में राज्य करे।
संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली,
जय काली कल्याण करे॥


1.

मंगल की सेवा सुन मेरी देवा,
हाथ जोड तेरे द्वार खडे।
पान सुपारी ध्वजा नारियल
ले ज्वाला तेरी भेट धरे॥


2.

सुन जगदम्बे न कर विलम्बे,
संतन के भडांर भरे।
संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली,
जय काली कल्याण करे॥

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मंगल की सेवा सुन मेरी देवा – कालीमाता की आरती
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जय जय सुरनायक, जन सुखदायक

1.

जय जय सुरनायक, जन सुखदायक,
प्रनतपाल भगवंता।
गो द्विज हितकारी, जय असुरारी,
सिधुंसुता प्रिय कंता॥
॥जय जय सुरनायक॥


2.

पालन सुर धरनी, अद्भुत करनी,
मरम न जानइ कोई।
जो सहज कृपाला, दीनदयाला,
करउ अनुग्रह सोई॥


3.

जय जय अबिनासी, सब घट बासी
ब्यापक परमानंदा।
अबिगत गोतीतं चरित पुनीतं,
मायारहित मुकुंदा॥

॥जय जय सुरनायक॥


4.

जेहि लागि बिरागी अति अनुरागी
बिगतमोह मुनिबृंदा।
निसि बासर ध्यावहिं गुन गन गावहिं,
जयति सच्चिदानंदा॥


5.

जेहिं सृष्टि उपाई त्रिबिध बनाई,
संग सहाय न दूजा।
सो करउ अघारी चिंत हमारी,
जानिअ भगति न पूजा॥

॥जय जय सुरनायक॥


6.

जो भव भय भंजन मुनि मन रंजन,
गंजन बिपति बरूथा।
मन बच क्रम बानी छाड़ि सयानी,
सरन सकल सुर जूथा॥


7.

सारद श्रुति सेषा रिषय असेषा,
जा कहुँ कोउ नहि जाना।
जेहि दीन पिआरे बेद पुकारे द्
रवउ सो श्रीभगवाना॥

॥जय जय सुरनायक॥


8.

भव बारिधि मंदर, सब बिधि सुंदर,
गुनमंदिर सुखपुंजा।
मुनि सिद्ध सकल, सुर परम भयातुर,
नमत नाथ पद कंजा॥


9.

जय जय सुरनायक, जन सुखदायक,
प्रनतपाल भगवंता।
गो द्विज हितकारी, जय असुरारी,
सिधुंसुता प्रिय कंता॥

॥जय जय सुरनायक॥


10.

जय जय सुरनायक, जन सुखदायक,
प्रनतपाल भगवंता।
गो द्विज हितकारी, जय असुरारी,
सिधुंसुता प्रिय कंता॥

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Jay Jay Surnayak Jan Sukhdayak
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आरती गजवदन विनायक की

1.

आरती गजवदन विनायक की।
सुर मुनि-पूजित गणनायक की॥


2.

एकदंत, शशिभाल, गजानन,
विघ्नविनाशक, शुभगुण कानन,
शिवसुत, वन्द्यमान-चतुरानन,
दु:खविनाशक, सुखदायक की॥

आरती गजवदन विनायक की।
सुर मुनि-पूजित गणनायक की॥


3.

ऋद्धि-सिद्धि स्वामी समर्थ अति,
विमल बुद्धि दाता सुविमल-मति,
अघ-वन-दहन, अमल अविगत गति,
विद्या, विनय-विभव दायक की॥

आरती गजवदन विनायक की।
सुर मुनि-पूजित गणनायक की॥


4.

पिंगलनयन, विशाल शुंडधर,
धूम्रवर्ण, शुचि वज्रांकुश-कर,
लम्बोदर, बाधा-विपत्ति-हर,
सुर-वन्दित सब विधि लायक की॥

आरती गजवदन विनायक की।
सुर मुनि-पूजित गणनायक की॥


5.

आरती गजवदन विनायक की।
सुर मुनि-पूजित गणनायक की॥

Aarti

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Aarti Gajvadan Vinayak Ki - Ganesh Aarti
Categories
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जय जय सरस्वती माता – माँ सरस्वती आरती

1.

जय सरस्वती माता,
जय जय सरस्वती माता।
सद्दग़ुण वैभव शालिनि,
त्रिभुवन विख्याता॥
॥जय जय सरस्वती माता॥


2.

चंद्रवदनि पद्मासिनि,
द्युति (छवि) मंगलकारी,
मैया द्युति मंगलकारी।
सोहे शुभ हंस सवारी,
अतुल तेजधारी॥
॥जय जय सरस्वती माता॥


3.

बाएं कर में वीणा,
दाएं कर माला,
मैया दाएं कर माला।
शीश मुकुट मणि सोहे,
गल मोतियन माला॥
॥जय जय सरस्वती माता॥


4.

देवी शरण जो आए,
उनका उद्धार किया,
मैया उनका उद्धार किया।
पैठि मंथरा दासी,
रावण संहार किया॥
॥जय जय सरस्वती माता॥


5.

विद्या ज्ञान प्रदायिनि,
ज्ञान प्रकाश भरो।
मैया ज्ञान प्रकाश भरो।
मोह, अज्ञान और तिमिर का,
जग से नाश करो॥
॥जय जय सरस्वती माता॥


6.

धूप दीप फल मेवा,
मां स्वीकार करो,
मैया स्वीकार करो।
ज्ञानचक्षु दे माता,
जग निस्तार करो॥
॥जय जय सरस्वती माता॥


7.

मां सरस्वती की आरती,
जो कोई जन गावे,
मैया जो कोई जन गावे।
हितकारी सुखकारी,
ज्ञान भक्ति पावे॥
॥जय जय सरस्वती माता॥


8.

जय सरस्वती माता,
जय जय सरस्वती माता।
सद्दग़ुण वैभव शालिनि,
त्रिभुवन विख्याता॥
॥जय जय सरस्वती माता॥

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Jai Jai Saraswati Mata - Maa Saraswati ki Aarti
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गंगा जी की आरती – गंगा आरती

1.

ओम जय गंगे माता,
मैया जय गंगे माता।
जो नर तुमको ध्याता,
मनवांछित फल पाता॥
॥ओम जय गंगे माता॥


2.

चन्द्र-सी ज्योति तुम्हारी,
जल निर्मल आता,
मैया जल निर्मल आता।
शरण पड़े जो तेरी,
सो नर तर जाता॥

॥ओम जय गंगे माता॥


3.

पुत्र सगर के तारे,
सब जग को ज्ञाता,
मैया सब जग को ज्ञाता।
कृपा दृष्टि हो तुम्हारी,
त्रिभुवन सुख दाता॥

॥ओम जय गंगे माता॥


4.

एक ही बार जो तेरी,
शरणागति आता,
मैया शरणागति आता।
यम की त्रास मिटाकर,
परमगति पाता॥

॥ओम जय गंगे माता॥


5.

आरती माता तुम्हारी,
जो जन नित गाता,
मैया जो जन नित गाता।
दास वही सहज में,
मुक्ति को पाता॥

॥ओम जय गंगे माता॥


6.

ओम जय गंगे माता,
मैया जय गंगे माता।
जो नर तुमको ध्याता,
मनवांछित फल पाता॥

॥ओम जय गंगे माता॥

Aarti

Chalisa

Ganga Aarti - Ganga Ji Ki Aarti