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Aarti

मैं आरती तेरी गाउँ, ओ केशव कुञ्ज बिहारी

1.

मैं आरती तेरी गाउँ,
ओ केशव कुञ्ज बिहारी।
मैं नित नित शीश नवाऊँ,
ओ मोहन कृष्ण मुरारी॥


2.

है तेरी छबि अनोखी,
ऐसी ना दूजी देखी।
तुझ सा ना सुन्दर कोई,
ओ मोर मुकुटधारी॥


3.

मैं आरती तेरी गाउँ,
ओ केशव कुञ्ज बिहारी।
मैं नित नित शीश नवाऊँ,
ओ मोहन कृष्ण मुरारी॥


4.

जो आए शरण तिहारी,
विपदा मिट जाए सारी।
हम सब पर कृपा रखना,
ओ जगत के पालनहारी॥


5.

मैं आरती तेरी गाउँ,
ओ केशव कुञ्ज बिहारी।
मैं नित नित शीश नवाऊँ,
ओ मोहन कृष्ण मुरारी॥

Aarti

Chalisa

मैं आरती तेरी गाउँ, ओ केशव कुञ्ज बिहारी