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सत्यनारायण कथा – पांचवा अध्याय

<< सत्यनारायण कथा अध्याय 4

  • श्री सूतजी ने आगे कहा-
  • है ऋषियो!
  • मैं एक और भी कथा कहता हूं, सुनो –
  • प्रजापालन में लीन तुंगध्वज नाम का,
  • एक राजा था।
  • उसने भगवान सत्यदेव का,
  • प्रसाद त्यागकर बहुत दुख पाया।

  • एक समय राजा वन में,
  • वन्य पशुओं को मारकर,
  • बड़ के वृक्ष के नीचे आया।
  • वहां उसने ग्वालों को,
  • भक्तिभाव से बंधु-बांधवों सहित,
  • श्रीसत्यनारायणजी का पूजन करते देखा।
  • परंतु राजा देखकर भी,
  • अभिमानवश न तो वहां गया और
  • न ही सत्यदेव भगवान को नमस्कार ही किया।
  • जब ग्वालों ने भगवान का प्रसाद,
  • उसके सामने रखा,
  • तो वह प्रसाद त्यागकर,
  • अपने नगर को चला गया।
  • नगर में पहुंचकर उसने देखा कि
  • उसका सबकुछ नष्ट हो गया है।
  • वह समझ गया कि
  • यह सब भगवान सत्यदेव ने हि किया है।
  • तब वह उसी स्थान पर वापस आया और
  • ग्वालों के समीप गया और
  • विधिपूर्वक पूजन कर प्रसाद खाया,
  • तो सत्यनारायण की कृपा से,
  • सबकुछ पहले जैसा ही हो गया और
  • दीर्घकाल तक सुख भोगकर,
  • मरने पर स्वर्गलोक को चला गया।

  • जो मनुष्य इस परम दुर्लभ व्रत को करेगा,
  • श्री सत्यनारायण भगवान की कृपा से,
  • उसे धन-धान्य की प्राप्ति होगी।
  • बंदी, बंधन से मुक्त होकर,
  • निर्भय हो जाता है।
  • संतानहीन को,
  • संतान प्राप्त होती है तथा
  • सब मनोरथ पूर्ण होकर अंत में वह,
  • बैकुंठ धाम को जाता है।

  • जिन्होंने पहले इस व्रत को किया,
  • अब उनके दूसरे जन्म की कथा भी सुनिए।
  • शतानंद नामक वृद्ध ब्राह्मण ने यह व्रत किया,
  • जिसने सुदामा के रूप में जन्म लेकर,
  • श्रीकृष्ण की भक्ति कर मोक्ष प्राप्त किया।
  • उल्कामुख नाम के महाराज,
  • इस व्रत के पुण्य से,
  • राजा दशरथ बने और
  • श्री रंगनाथ का पूजन कर
  • मृत्यु के बाद बैकुंठलोक को प्राप्त हुए।
  • साधु नाम के वैश्य ने,
  • सत्यप्रतिज्ञ राजा मोरध्वज बनकर,
  • अपने पुत्र को आरे से चीरकर,
  • मोक्ष प्राप्त किया।
  • वह भी इसी व्रत का फल था।
  • इसी तरह महाराज तुंगध्वज,
  • स्वयंभू मनु हुए,
  • जिन्होंने बहुत से लोगों को,
  • भगवान की भक्ति में लीन,
  • कर मोक्ष प्राप्त किया।
  • लकड़हारा भील,
  • अगले जन्म में गुह नामक निषाद राजा हुआ,
  • जिसने भगवान राम के चरणों की सेवा कर,
  • मोक्ष प्राप्त किया।

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Satyanarayan Katha - Adhyay 5