Kailash Ke Nivasi Namo – Adhyatmik Arth



कैलाश के निवासी नमो बार बार भजन का आध्यात्मिक अर्थ

Part 1

कैलाश के निवासी नमो बार बार हूँ,
नमो बार बार हूँ
आयो शरण तिहारी भोले तार तार तू
आयो शरण तिहारी शम्भू तार तार तू,
भोले तार तार तू, कैलाश के निवासी…

कैलाश के निवासी नमो बार बार हूं, नमो बार बार हूं

ये पंक्तियाँ कैलाश पर्वत के निवासी भगवान शिव के प्रति अभिनंदन और श्रद्धा की अभिव्यक्ति हैं। भक्त बार-बार विनम्र अभिवादन करता है और भगवान को प्रणाम करता है।

आयो शरण तिहारी भोले तार तार तू

पंक्तियाँ भगवान शिव की शरण लेने की भावना को व्यक्त करती हैं, उन्हें उद्धारकर्ता के रूप में संबोधित करती हैं जो रक्षा करता है और मुक्त करता है। भक्त मानते हैं कि भगवान शिव ही उद्धारकर्ता हैं जो उन्हें संकट से बचाते हैं और मोक्ष प्रदान करते हैं।


Part 2

भक्तो को कभी शिव तुने निराश ना किया
माँगा जिन्हें जो चाहा वरदान दे दिया
बड़ा हैं तेरा दायजा, बड़ा दातार तू,
आयो शरण तिहारी भोले तार तार तू
कैलाश के निवासी नमो बार बार हूँ…

भक्तो को कभी शिव तूने निराश ना किया

यह श्लोक आश्वस्त करता है कि भगवान शिव ने अपने भक्तों को कभी निराश नहीं किया है। यह दर्शाता है कि भगवान ने हमेशा अपने भक्तों की इच्छाओं और इच्छाओं को पूरा किया है।

मांगा जिन्हें जो चाहा वरदान दे दिया

यहां, यह कहा गया है कि भगवान शिव उनकी इच्छाएं पूरी करते हैं और उन लोगों को आशीर्वाद देते हैं जो उनका दिव्य हस्तक्षेप चाहते हैं। वह अपने भक्तों की इच्छाओं को पूरा करने के लिए जाने जाते हैं।

बड़ा हैं तेरा दायजा, बड़ा दातार तू

ये पंक्तियाँ भगवान शिव की उदारता को उजागर करती हैं। यह दर्शाती है कि वह परम दाता है, जो अपने भक्तों पर प्रचुर आशीर्वाद और उपहारों की वर्षा करता है।


Part 3

बखान क्या करू मै राखो के ढेर का
चपटी भभूत में हैं खजाना कुबेर का
हैं गंग धार, मुक्ति द्वार, ओंकार तू
आयो शरण तिहारी भोले तार तार तू
कैलाश के निवासी नमो बार बार हूँ….

बखान क्या करूं मैं राखो के ढेर का,
चपटी भभूत में हैं खजाना कुबेर का

ये पंक्तियाँ भक्तों की दुविधा को व्यक्त करती हैं कि वे भगवान शिव के असीम आशीर्वाद के बदले में क्या अर्पित कर सकते हैं। इससे पता चलता है कि धन के देवता भगवान कुबेर का खजाना, भक्त द्वारा दिए गए अल्प चढ़ावे में भी मौजूद होता है।

है गंग धर, मुक्ति द्वार, ओंकार तू
यह श्लोक भगवान शिव को दिव्य नदी गंगा (गंग धार) को धारण करने वाले और मुक्ति का प्रवेश द्वार (मुक्ति द्वार) के रूप में स्वीकार करता है। यह उन्हें पवित्र ध्वनि “ओम” (ओंकार) के अवतार के रूप में भी पहचानता है।


Part 4

क्या क्या नहीं दिया, हम क्या प्रमाण दे
बस गए त्रिलोक शम्भू तेरे दान से
ज़हर पिया, जीवन दिया
कितना उदार तू, कितना उदार तू,
आयो शरण तिहारी भोले तार तार तू
कैलाश के निवासी नमो बार बार हूँ….

क्या क्या नहीं दिया, हम क्या प्रमाण दे,
बस गए त्रिलोक शम्भू तेरे दान से

ये पंक्तियाँ भगवान शिव द्वारा उन्हें दिए गए अनगिनत आशीर्वादों पर भक्त के चिंतन को व्यक्त करती हैं। भक्त विचार करता है कि जो कुछ उन्हें प्राप्त हुआ है, उसके लिए वे क्या साक्ष्य या प्रमाण प्रदान कर सकते हैं। यह इस धारणा पर प्रकाश डालता है कि संपूर्ण ब्रह्मांड भगवान शिव के दिव्य उपहारों से समृद्ध हुआ है।

ज़हर पिया, जीवन दिया, कितना उदार तू

यहाँ, यह प्रतीकात्मक रूप से व्यक्त किया गया है कि भगवान शिव ने जहर (ज़हर) पी लिया है और जीवन (जीवन) प्रदान किया है। यह भगवान शिव की दिव्य उदारता का प्रतीक है, उनकी असीम करुणा और परोपकार पर जोर देता है।

यह पंक्ति हिंदू पौराणिक कहानी को भी संदर्भित करती है जिसमें भगवान शिव ने देवताओं की रक्षा और ब्रह्मांडीय संतुलन बनाए रखने के लिए समुद्र मंथन के दौरान जहर पी लिया था। यह विश्व कल्याण के लिए भगवान शिव द्वारा की गयी कृपा का प्रतीक है।


Part 5

तेरी कृपा बिना न हिलें एक भी अनु
लेते हैं स्वास तेरी दया से कनु कनु
कहे दास एक बार, मुझको निहार तू
आयो शरण तिहारी भोले तार तार तू
कैलाश के निवासी नमो बार बार हूँ….

तेरी कृपा बिना ना हिले एक भी अनु,
लेते हैं स्वास तेरी दया से कनु कनु

ये पंक्तियाँ भक्त की मान्यता को व्यक्त करती हैं कि भगवान शिव की कृपा के बिना एक भी परमाणु नहीं हिलता। यह भक्त की गहरी समझ का प्रतीक है कि उनकी हर सांस भगवान की दया और करुणा से बनी रहती है।

कहे दास एक बार, मुझको निहार तू

यह श्लोक भगवान शिव से भक्त की विनती को व्यक्त करता है, जो उनसे विनम्रतापूर्वक उन पर अपनी दिव्य दृष्टि बरसाने का अनुरोध करता है। यह भक्त की भगवान की कृपा और ध्यान प्राप्त करने की इच्छा को दर्शाता है।


Summary

कुल मिलाकर भजन की ये पंक्तियाँ भगवान शिव के प्रति गहरी श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करती हैं। भक्त भगवान से प्राप्त अपार आशीर्वाद को स्वीकार करता है और रक्षक, जीवनदाता और अनुग्रह दाता के रूप में उनकी भूमिका को पहचानते हुए उनकी शरण चाहता है। भक्त भगवान शिव की उदारता और दिव्य गुणों को पहचानकर उनकी शरण लेता है।


Kailash Ke Nivasi Namo Bar Bar

Shri Rameshbhai Oza

Shri Narayan Swami


कैलाश के निवासी नमो बार बार

कैलाश के निवासी नमो बार बार हूँ, नमो बार बार हूँ
आयो शरण तिहारी भोले तार तार तू
आयो शरण तिहारी शम्भू तार तार तू,
भोले तार तार तू, कैलाश के निवासी…


भक्तो को कभी शिव तुने निराश ना किया
माँगा जिन्हें जो चाहा वरदान दे दिया
बड़ा हैं तेरा दायजा, बड़ा दातार तू,
आयो शरण तिहारी भोले तार तार तू
कैलाश के निवासी नमो बार बार हूँ…


बखान क्या करू मै राखो के ढेर का
चपटी भभूत में हैं खजाना कुबेर का
हैं गंग धार, मुक्ति द्वार, ओंकार तू
आयो शरण तिहारी भोले तार तार तू
कैलाश के निवासी नमो बार बार हूँ….


क्या क्या नहीं दिया, हम क्या प्रमाण दे
बस गए त्रिलोक शम्भू तेरे दान से
ज़हर पिया, जीवन दिया
कितना उदार तू, कितना उदार तू,
आयो शरण तिहारी भोले तार तार तू
कैलाश के निवासी नमो बार बार हूँ….


तेरी कृपा बिना न हिलें एक भी अनु
लेते हैं स्वास तेरी दया से कनु कनु
कहे दास एक बार, मुझको निहार तू
आयो शरण तिहारी भोले तार तार तू
कैलाश के निवासी नमो बार बार हूँ….


कैलाश के निवासी नमो बार बार हूँ, नमो बार बार हूँ
आयो शरण तिहारी भोले तार तार तू
आयो शरण तिहारी शम्भू तार तार तू


Shiv Stotra Mantra Aarti Chalisa Bhajan